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पर्यावरण विज्ञान
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5 लेख
पर्यावरण विज्ञान
वायरस N95 के छेदों से कहीं छोटा है। मास्क फिर भी उसे पकड़ लेता है — और बड़े कण से बेहतर पकड़ता है
यह दलील कि मास्क वायरस नहीं रोक सकता क्योंकि वायरस छेदों से छोटा है, यह मानकर चलती है कि फ़िल्टर एक छलनी है। वह छलनी नहीं है। पकड़ने के चार अलग तंत्र चलते हैं, और फ़िल्टर को सबसे ज़्यादा दिक़्क़त बीच के आकार से होती है — इसीलिए बहुत छोटे कण मँझले कणों से ज़्यादा आसानी से पकड़े जाते हैं।
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दीवार पर लगी पुरानी पेंट शायद नुक़सान नहीं कर रही — ख़तरा उसे रगड़कर उतारने में है
भारत ने 2016 में घरेलू पेंट में सीसे की सीमा 90 ppm तय की। उससे पहले रंगी हुई हर चीज़ उससे कहीं ऊपर हो सकती है — और ख़तरा दीवार पर जमी साबुत परत नहीं, बल्कि वह धूल है जो दोबारा रंगाई से पहले सतह घिसते समय उड़ती है। पेंट में सीसा डाला ही क्यों जाता था, ख़तरा असल में किसे है, और अक्सर उसे वहीं रहने देना बेहतर जवाब क्यों है।
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उबालने से फ़्लोराइड निकलता नहीं, और गाढ़ा हो जाता है। उसे हटाती है मेटल ऑक्साइड की सतह
भारतीय भूजल का फ़्लोराइड और आर्सेनिक उबालने, क्लोरीन और हर कैंडल फ़िल्टर से सीधे निकल जाता है, क्योंकि वे कण या कीटाणु नहीं — घुले हुए आयन हैं। उन्हें हटाता क्या है, आर्सेनिक को पहले ऑक्सीकृत क्यों करना पड़ता है, और 'नैनो' कहाँ सचमुच काम आता है और कहाँ सिर्फ़ डिब्बे पर लिखा होता है।
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फ़ोन पर AQI 180, बोर्ड पर 300 — दोनों सही हो सकते हैं
AQI कोई माप नहीं है — यह मापों पर लगाया गया एक फ़ॉर्मूला है। यह फ़ॉर्मूला समझते ही पता चलता है कि दो ऐप अलग-अलग आँकड़े क्यों दिखाते हैं, ख़राब शाम के घंटों बाद नंबर क्यों चढ़ता है, और 'संतोषजनक' का मतलब साफ़ हवा क्यों नहीं है।
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जल शोधन संयंत्र पानी को कैसे साफ़ करता है
नदी के पानी को पीने लायक़ बनाना कई सोचे-समझे चरणों की एक कड़ी है, जिसमें हर चरण वह हटाता है जो पिछला नहीं हटा सका। जानिए इनटेक से नल तक बीच में क्या होता है, और क्रम क्यों मायने रखता है।
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