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पिछले साल का दो-तिहाई शोध मुफ़्त पढ़ा जा सकता है। भारत का लगभग आधा नहीं — और छूटने के लिए यही सबसे ग़लत आधा है

शिक्षा एवं सामाजिक विज्ञान

पिछले साल का दो-तिहाई शोध मुफ़्त पढ़ा जा सकता है। भारत का लगभग आधा नहीं — और छूटने के लिए यही सबसे ग़लत आधा है

22 सित॰ 2026 · 8 मिनट का पठन

हमने नापा: 2025 में छपी 1.467 करोड़ कृतियों में से 46.5 लाख बंद हैं। भारतीय संबद्धता वाले काम का 46 प्रतिशत बंद है। और साहित्य-समीक्षा जितना पीछे जाती है, मुफ़्त हिस्सा उतना पतला — 1995 सिर्फ़ 15.7 प्रतिशत खुला है।

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