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“नैनोमटेरियल” टैग वाले सभी लेख।
10 लेख
पर्यावरण विज्ञान
वायरस N95 के छेदों से कहीं छोटा है। मास्क फिर भी उसे पकड़ लेता है — और बड़े कण से बेहतर पकड़ता है
यह दलील कि मास्क वायरस नहीं रोक सकता क्योंकि वायरस छेदों से छोटा है, यह मानकर चलती है कि फ़िल्टर एक छलनी है। वह छलनी नहीं है। पकड़ने के चार अलग तंत्र चलते हैं, और फ़िल्टर को सबसे ज़्यादा दिक़्क़त बीच के आकार से होती है — इसीलिए बहुत छोटे कण मँझले कणों से ज़्यादा आसानी से पकड़े जाते हैं।
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भौतिक विज्ञान
मोर के पंख को पीस दीजिए, नीला रंग ग़ायब हो जाएगा। उसमें नीला कभी था ही नहीं
प्रकृति के कुछ सबसे चटख रंगों में रंजक होता ही नहीं। वे प्रकाश की तरंगदैर्घ्य जितनी बड़ी संरचनाओं से बनते हैं — यानी रंग बनावट में है, इसलिए वह फीका नहीं पड़ सकता, और उसे पेंट, पैकेजिंग और नोटों में बनाया भी जा सकता है।
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ऊर्जा
सुपरकैपेसिटर सेकंडों में चार्ज होता है और दस लाख चक्र झेल जाता है। फिर भी वह आपके फ़ोन में नहीं आ रहा
सुपरकैपेसिटर आवेश को किसी मटेरियल के भीतर ठूँसकर नहीं, सतह से सटाकर रखता है — इसी से वह तेज़ और लगभग अमर है, और इसी से उसमें ऊर्जा बहुत कम समाती है। यह वह इकलौता उपकरण है जिसमें प्रति ग्राम सतही क्षेत्रफल कोई सुधार नहीं, पूरा उत्पाद ही है।
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भौतिक विज्ञान
दो चिकनी धातु सतहें अपने क्षेत्रफल के मुश्किल से एक प्रतिशत पर छूती हैं। बाक़ी हवा है — और वही आपका लैपटॉप तपाती है
प्रोसेसर इसलिए गरम नहीं होता कि ताँबा ऊष्मा ठीक से नहीं ले जाता। वह जोड़ों पर अटकता है — और नैनो पैमाने पर ऊष्मा का बर्ताव उस आम धारणा से ठीक उलटा है कि छोटा हमेशा बेहतर होता है। यही उलटाव चिप के लिए समस्या है और थर्मोइलेक्ट्रिक की पूरी बुनियाद।
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रसायन विज्ञान
एक सफ़र का ज़्यादातर प्रदूषण पहले दो मिनट में निकल जाता है, जब कन्वर्टर जागा ही नहीं होता
कैटेलिटिक कन्वर्टर में प्लैटिनम समूह की चंद ग्राम धातु होती है, इतनी बारीक बँटी हुई कि उसके ज़्यादातर परमाणु किसी न किसी सतह पर बैठे हैं। यह नैनो पैमाने की शानदार इंजीनियरिंग है, जो गरम हुए बिना कुछ नहीं करती — इसीलिए छोटी दूरी के सफ़र अपनी दूरी से कहीं ज़्यादा प्रदूषण करते हैं।
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ऊर्जा
बैटरी इस्तेमाल न करने पर भी बूढ़ी होती है। वजह है कुछ नैनोमीटर मोटी एक परत
लिथियम-आयन सेल जेब में ही नहीं, अलमारी में रखे-रखे भी क्षमता खोती है। वजह वह परत है जो पहली ही चार्जिंग में एनोड पर बन जाती है, बैटरी की पूरी उम्र भर धीरे-धीरे बढ़ती रहती है, और इस दौरान चुपचाप लिथियम खाती रहती है। इसे समझ लेने पर बैटरी की लगभग हर काम की सलाह अपने आप समझ आ जाती है।
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पर्यावरण विज्ञान
उबालने से फ़्लोराइड निकलता नहीं, और गाढ़ा हो जाता है। उसे हटाती है मेटल ऑक्साइड की सतह
भारतीय भूजल का फ़्लोराइड और आर्सेनिक उबालने, क्लोरीन और हर कैंडल फ़िल्टर से सीधे निकल जाता है, क्योंकि वे कण या कीटाणु नहीं — घुले हुए आयन हैं। उन्हें हटाता क्या है, आर्सेनिक को पहले ऑक्सीकृत क्यों करना पड़ता है, और 'नैनो' कहाँ सचमुच काम आता है और कहाँ सिर्फ़ डिब्बे पर लिखा होता है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स
आपका एयर क्वालिटी मॉनिटर सूँघता नहीं है। वह टिन ऑक्साइड के कण से चिपकी ऑक्सीजन देखता है
रसोई के LPG अलार्म और दो हज़ार रुपये वाले इनडोर एयर मॉनिटर के भीतर बैठा गैस सेंसर असल में मेटल ऑक्साइड का एक गरम कण है, जिसका विद्युत प्रतिरोध तब बदलता है जब कोई गैस उसकी सतह से चिपकी ऑक्सीजन उड़ा ले जाती है। यह एक वाक्य समझ लेने पर पता चलता है कि रीडिंग खिसकती क्यों है, नमी उसे भ्रमित क्यों करती है, और 'CO₂' वाला आँकड़ा अक्सर माप होता ही क्यों नहीं।
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नैनोटेक्नोलॉजी
दो बोतलों पर लिखा है '40 nm ज़िंक ऑक्साइड'। वे एक ही पाउडर नहीं हैं — वजह रिएक्टर है
हर नैनोमटेरियल डेटाशीट यह बताती है कि क्या पहुँचा। यह लगभग कभी नहीं बताती कि वह बना कैसे — जबकि बनाने का रास्ता ही आकार-वितरण, दोष, अशुद्धियाँ और वह क़ीमत तय करता है जो एक ही यौगिक के लिए दस हज़ार गुना तक अलग हो सकती है।
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नैनोटेक्नोलॉजी
एक कार्बन नैनोट्यूब स्टील से मज़बूत है। उनकी रस्सी नहीं — और वजह जानने लायक़ है
अकेली कार्बन नैनोट्यूब अब तक मापी गई सबसे मज़बूत चीज़ों में है। अरबों नैनोट्यूब से बनी रस्सी उससे दस-बीस गुना कमज़ोर निकलती है। यह फ़र्क़ बनाने की चूक नहीं, भौतिकी है — और यही बताता है कि नैनोट्यूब आज असल में किस काम आती है।
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