इलेक्ट्रॉनिक्स
जिस रोशनी से छाप रहे हैं, उससे महीन लकीर छापी नहीं जा सकती। चिप उद्योग बीस साल से यही कर रहा है
17 सित॰ 2026 · 10 मिनट का पठन
प्रकाशिकी कहती है कि प्रक्षेपित आकृति इस्तेमाल की गई तरंगदैर्ध्य से बहुत छोटी नहीं हो सकती। चिप बनाने वालों ने 2004 के आसपास यह मानना छोड़ दिया और तब से लगातार इस सीमा को चकमा दे रहे हैं — पानी से, बार-बार छापकर, और आख़िर में ऐसी तरंगदैर्ध्य से जिसे धरती का कोई लेंस केंद्रित ही नहीं कर सकता।
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